उत्तराखंड की त्रिवेंद्र रावत सरकार अपने कार्यकाल में पूरी तरह विफल साबित हुई है रावत सरकार के सभी मंत्री ऐसा कुछ भी नहीं कर पाए हैं जिसे उपलब्धि कहा जाए। आज हालात यह हैं कि उत्तराखंड दिनोंदिन पिछ्रता जा रहा है व कोई ऐसा विभाग नहीं है जहां भ्रष्टाचार का बोलबाला ना हो 3 साल बीत चुके हैं लेकिन विकास की जो बयार की बात की गई थी वह तो छोड़ो जो पिछला था वह भी हाथ से निकल गया है।

आज स्वास्थ्य के मामले में उत्तराखंड का ऐसा कोई भी अस्पताल नहीं है जहां मरीज को इलाज मिल पाए कुमाऊ का सबसे बड़ा अस्पताल सुशीला तिवारी पूरी तरह विफल हो चुका है व ब्राह्मण ठाकुर की राजनीति में फस कर अपना उद्देश्य खो चुका है।

राज्य में केवल खनन और शराब का बोलबाला है जोकि लाटी सरकार के मुख्यमंत्री के खुद के विभाग हैं अब जब 3 साल से ज्यादा बीत चुके हैं तो सरकार को सुध आई है की जनता के लिए भी कुछ करना चाहिए आज जब सरकार के पास पैसा नहीं है तो लोकलुभावन नीतियों को लाकर लोगों को रिझाने में लगी है और ऐसी एक नीति है एक रुपए में पानी कनेक्शन लो।

उत्तराखंड की स्थिति किस्से भी छुपी नहीं है यही कारण है कि लोग गर्मियों क्या सर्दियों में भी पानी के लिए तरसते हैं सरकार के पास पानी के वितरण की कोई व्यवस्था नहीं है उसके बावजूद सरकार गाल बजाने में लगी ही हैं। 

इस बार सरकार एक रुपए में जल कनेक्शन योजना लाई है इसे भाजपाई ही नहीं प्रधानमंत्री भी मील की योजना बता रहे हैं। इतना सब होने के बावजूद यह कोई बताने को तैयार नहीं है कि इस योजना के लिए पानी आएगा कहां से? क्योंकि पानी बचाने/संरक्षण के लिए कोई योजना नहीं है। 

जो सरकार अभी पानी वितरण नहीं कर पा रही है तो क्या वह बाद में सभी लोगों को पानी दे पाएगी लोगों को आगे आकर यह प्रश्न सरकार से पूछा चाहिए कि जब अभी पानी नहीं दे पा रहे हैं तो कल कैसे दे पाओगे? क्योंकि अगर आपने जल का कनेक्शन ले लिया तो पानी आए या ना आए आपको उसका बिल तो भरना पड़ेगा उस समय यह लोग सामने नहीं आएंगे और आप ही को धक्के खाने पड़ेंगे।  

पूर्व की रावत सरकार ने करोड़ो रुपए के एडीबी से कर्ज लेकर हल्द्वानी में टैंक बनाए थे आज तक उन टैंको का क्या हुआ किसी को पता नहीं लेकिन सरकार उन टैंको का पैसा भी मय ब्याज एडीबी को दे रही है जो कि आपकी ही जेब से पानी के बढ़े हुए मूल्य के रूप में जा रहा है।

अगर यही हालत रहे तो पानी किसी को मिले ना मिले बिल समय पर जरूर मिलते रहेंगे इसलिए बेहतर होगा कि आप लाटी सरकार के झुंझुनू को थामने की बजाय सोचे कि क्या सरकार सच में ऐसा कर पाएगी क्योंकि आज जल नहीं है कल कैसे होगा?

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