अरविन्द अलका की तकरार से चांदनी चौक बदहाल
अरविन्द अलका की तकरार से चांदनी चौक बदहाल

चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र की पूर्व विधायक अलका लांबा आजकल खासी परेशान हैं। उनमें बड़ी मेहनत कर अपने इलाके जामा मस्जिद में एक अवैध इलाके को खाली कर वहां मोहल्ला क्लिनिक का निर्माण करवाया था। लेकिन यह अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।

इसे चालू करवाने के लिए वह खासे जतन कर चुकी हैं, लेकिन हाथ कुछ नहीं लगा है। फिलहाल वहां करीब आठ माह से मोहल्ला क्लिनिक का स्ट्रक्चर खड़ा हुआ है और उसमें नशेड़ियों का जमावड़ा है।

अलका लांबा ने आम आदमी पार्टी के संयोजक व सीएम अरविंद केजरीवाल से लंबी तकरार के बाद पार्टी व विधायक पद से इस्तीफा देते हुए कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली है। लेकिन इससे पहले उन्होंने अपनी विधानसभा के जामा मस्जिद इलाके में मोहल्ला क्लिनिक बनाने के लिए लंब कवायद की। उनका कहना है कि जिस स्थान पर इसे बनाया जाना था, वहां सालों पहले तांगा स्टैंड था।

तांगों का रिवाज खत्म होने के बाद वहां लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया। अलका बताती हैं उन्होंने बड़ी मुश्किल से एमसीडी से गुजारिश कर उस इलाके को खाली करवाया, जिसके बाद उन्होंने वहां मोहल्ला क्लिनिक के निर्माण के लिए दिल्ली सरकार से मंजूरी ले ली।

उस दौरान स्वास्थय मंत्री सत्येंद्र जैन ने भी उनकी सराहना की कि वह ऐसे इलाके में क्लिनिक बनवा रही हैं, जहां इसकी बहुत सख्त जरूरत है। उनका कहना है कि लेकिन दुख की बात यह है कि अब इस मोहल्ला क्लिनिक का स्ट्रक्चर करीब आठ माह से खड़ा हुआ है।

वह मानती हैं कि इस दौरान कई मसलों पर उनकी पार्टी से असहमति हो गई और सीएम अरविंद केजरीवाल से बिगड़े संबंधों के चलते उन्हें पार्टी छोड़ दी साथ ही विधायक पद से भी इस्तीफा दे दिया। अलका इस बात से खासी दुखी हैं कि सीएम ने पर्सनल खुन्नस के चलते इस मोहल्ला क्लिनिक को बनने नहीं दिया।

जबकि इससे पहले तारीफ हो रही थी कि जामा मस्जिद जैसे इलाके में इसका निर्माण जरूरी था। उन्होंने कहा कि इलाके के लोग आकर उनसे पूछते हैं कि मोहल्ला क्लिनिक का निर्माण क्यों रुक गया।

अब वे लोगों को क्या बताएं। उनका आरोप है कि दिल्ली सरकार लोगों के हितों के लिए काम नहीं कर रही है। उसका टारगेट बस लोगों को बरगलाना है और वोट की राजनीति के तहत काम करना है।

उन्होंने कहा कि अब वहां नशेड़ियों ने कब्जा कर लिया है और ये नशेड़ी रात में लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। इस मसले पर दिल्ली सरकार के प्रवक्ता से बात की गई तो उनका कहना था कि अब यह बीती जमाने की बातें हो चुकी है

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